Saturday, 2 December 2017

झारखंड: खूंटी के बगमा गांव में भारी संख्‍या में पहुंचे नक्सली,


खूंटी : जिले के मुरहू थाना अंतर्गत बगमा गांव में भाजपा नेता भैया राम मुंडा की नक्सलियों ने बीती रात गोली मारकर हत्या कर दी. प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंडा के अलावा मां और उनकी पत्नी को भी गोली लगी हालांकि इलाज के बाद उनकी हालत खतरे से बाहर बतायी जा रही है.

बताया जा रहा है कि काफी संख्या में आये वर्दीधारी पीएलएफआइ उग्रवादियों ने घटना को अंजाम दिया है. गांव में हुई अंधाधुंध फायरिंग से दहशत का माहौल व्याप्त है. घटना रात के करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच की है. सूचना मिलने के बाद सुबह के 4:00 बजे एसडीपीओ रणवीर कुमार सिंह, थानेदार एके दुबे, सब इंस्पेक्टर बमबम कुमार, राजन  कुमार समेत काफी संख्या में पुलिस के जवान बगमा गांव पहुंचे.

खबर लिखे जाने तक मृतक भैया राम के पार्थिव शरीर को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है. मृतक भैया राम ग्रामप्रधान और महर्षि में ही आश्रम मालियादा के सचिव सचिब थे. घटना को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ महतो ने कहा कि भैयाराम मुंडा भाजपा एसटी मोर्चा में मंत्री थे. मै इस घटना की निंदा करता हूं.

Wednesday, 29 November 2017

दो नक्सलियों ने किया सरेंडर, एक दस लाख का इनामी तो दूसरा TPC का हार्डकोर




पलामू (झारखंड)। यहां प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के दस लाख रुपए के इनामी नक्सली एनुल मियां उर्फ गोविंद ने बुधवार को डीआईजी विपुल शुक्ला के सामने सरेंडर कर दिया। एनुल के अलावा एक अन्य नक्सली संगठन टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के भी एक हार्डकोर नक्सली अजय सहाय उर्फ रोशन ने हथियार डाले। 

- पलामू पुलिस इसे अपनी एक बड़ी कामयाबी मान रही है। एनुल उर्फ गोविंद पर राज्य सरकार ने दस लाख रुपए का इनाम रखा था।

- 52 वर्षीय गोविंद के खिलाफ पलामू जिले के हरिहरगंज, पिपरा, औरंगाबाद, मोहम्मदगंज इत्यादि जगहों में कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं।

- वहीं 30 वर्षीय रौशन के खिलाफ 24 मुकदमे विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं। टीपीसी नक्सली अजय साव उर्फ रोशन चैनपुर और रामगढ़ आदि जंगली क्षेत्रों में सक्रिय था।

- मौके पर डीआईजी विपुल शुक्ला ने ऑपरेशन नई दिशा के तहत एनुल मियां को उसपर घोषित इनाम की राशि के रूप में दस लाख रुपए का चेक सौंपा।

- इस अवसर पर पलामू के कमिश्नर राजीव अरुण एक्का, डिप्टी कमिश्नर अमित कुमार और एसपी इंद्रजीत महथा समेत अन्य ऑफिसर्स मौजूद रहे।

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2005 में बन गया था नक्सली, अभी था जोनल कमांडर
- पलामू के एसपी इंद्रजीम महथा ने बताया कि दस लाख का इनामी माओवादी एनुल मियां वर्ष 2005 में नक्सली बन गया था। उस समय वह एरिया कमिटी का सदस्य बनाया गया था। यह प्लाटून 29 दस्ता का मेंबर था, जिसका सचिव विनय यादव उर्फ मुराद उर्फ गुरुजी हुआ करता था।

- वर्तमान में एनुल संगठन में जोनल कमांडर के पद पर था। एनुल शादी-शुदा है। उसकी पत्नी सरवरी खातून है। उसे तीन बेटे और एक बेटी है। नक्सली बनने से पहले इसकी एक कपड़े की दुकान थी।

- पुलिस का दावा है कि एनुल मियां के सरेंडर से नक्सलियों को मध्य जोन (कोयल-सोन) में एक बड़ा झटका लगा है और इनका आधार स्तंभ ढ़ह गया है।

Tuesday, 28 November 2017

बंद पड़े पतरातू के उप स्वास्थ केंद्र में उग आई हैं बड़ी-बड़ी झाड़ियां


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झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड में उप स्वास्थ केंद्र का निर्माण कई साल पहले हुआ था. वर्षों पहले बने इस उप स्वास्थ केंद्र में ताला लटका है. अस्पताल के अंदर झाड़ियां उग गई हैं.

राज्य सरकार की ओर से सभी को चिकित्सा सेवा उपलब्ध करने के दावे भी किये जा है वैसे में रामगढों के पतरातू में एक ऐसा उप सवास्थ केंद्र है जो बनने के वर्षों बाद भी नहीं खुल पाया है.

करोड़ों रुपए की सरकार की स्वास्थ्य योजना सुदूर देहात में दम तोड़ती नजर आ रही है. इस मुद्दे पर एक स्थानीय ग्रामीण एम तनवीर ने बताया कि हमारे घर के सामने वर्षों पहले अस्पताल बना है लेकिन आज भी अपने बाल- बच्चों के इलाज के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.

जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत डूडगी पंचायत की मुखिया मुन्नी देवी ने बताया कि उप स्वास्थ केंद्र को खोलवाने के लिए जिला प्रशासन के ऑफिस का कई चक्कर हमने लगाया फिर भी कोई सकरात्मक पहल नहीं हुई.

इस मामले में राज्य में विपक्ष की भूमिका निभाने वाले जेवीएम के जिला अध्यक्ष गोबिंद बेदिया ने भी उप स्वास्थ केंद्र के मुद्दे पर जिला प्रशासन को दोषी ठहराया है. रामगढ़ की उपायुक्त राजेश्वरी बी ने इस मुद्दे पर कार्रवाई का भरोसा दिया है.

कोडरमा SP के ट्रांसफर का विरोध: लोगों ने किया रोड जाम, मंत्री की गाड़ी भी फंसी .


कोडरमा (झारखंड)। यहां के एसपी सुरेंद्र कुमार झा के ट्रांसफर के विरोध में मंगलवार सुबह लोगों ने रोड जाम कर दिया। बड़ी संख्या में युवाओं और अन्य लोगों ने झुमरी तिलैया स्थित महाराणा प्रताप चौक को जाम कर दिया और धरने पर बैठ गए। इस कारण यहां रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई और बड़ी संख्या में राहगीर फंस गए। शिक्षा मंत्री नीरा यादव की गाड़ी भी जाम में फंस गई। आम लोग उनके ट्रांसफर आदेश को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

-मालूम हो कि राज्य सरकार ने बीती देर शाम 9 जिलों के एसपी समेत 23 आईपीएस अधिकारियों का ट्रांसफर किया है।

-2010 बैच के आईपीएस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार झा यहां काफी लोकप्रिय थे और इसी कारण उनके ट्रांसफर से लोग नाराज हैं।

- सुरेंद्र झा इससे पहले रांची के ग्रामीण एसपी और धनबाद के एसएसपी भी रह चुके हैं। सुरेंद्र झा को गिरीडीह का नया एसपी बनाया गया है। 

पहचान खोने के कगार पर ऐतिहासिक तेलियागढ़ी किला.



साहेबगंज का ऐतिहासिक तेलियागढ़ी किला अब अपनी पहचान खोने के कगार पर है. सल्तनत और मुगलकाल में कभी बंगाल का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस किले का अब अस्तित्व मिटने लगा है.

राजा तेलिया ने इस किले का निर्माण कराया था. तब ये बेहतरीन किलों में शुमार था. ये ना सिर्फ खूबसूरती बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था. जिसका इतिहास में भी वर्णन मिलता है. 
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साहिबगंज जिले में स्थित इस किले की मौजूदगी का प्रमाण मौर्य काल से ही मिलने लगते हैं। चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में आये यवन राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक इंडिका में गंगा नदी से सटे पहाड़ी पर काले पत्थरों से निर्मित बड़े बौद्ध विहार का उल्लेख किया है। जो अब तेलियागढ़ी के नाम से जाना जाता है।

हर्षव‌र्द्धन के समय में इस क्षेत्र से गुजरे चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस किले का उल्लेख किया है। सोलहवीं सदी में भारत आए ईरानी यात्री अब्दुल लतीफ एवं अठारवीं सदी में इधर से होकर गुजरे फ्रांसिस बुकानन ने भी अपनी रचनाओं में इसे बड़े क्षेत्र में स्थित बताया है। जो अभी छोटे स्वरूप में दिखता है। परन्तु तेलियागढ़ी किला के पांच सौ मीटर पूर्व-पश्चिम में स्थित कई टीलों में मौजूद अवशेषों को देखकर लगता है कि विभिन्न विदेशी यात्रियों ने इस किले के बारे में जो लिखा है उसके अनुसार अपने काल में यह किला काफी लंबाई चौड़ाई में स्थित रहा होगा। किले की तत्कालीन लंबाई चौड़ाई का अनुमान किले से पूर्व करीब पांच सौ मीटर दूरी पर स्थित टिल्हे से झलकती मध्यकालीन दीवारों से लगाया जा सकता है। इसी प्रकार किले से पश्चिम रक्सी स्थान से उत्तर सिमरतल्ला झील में नौकाओं के लंगर डालने का स्थान भी इस बात का प्रमाण है कि यह किला करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। फिर करमटोला रेलवे स्टेशन से पश्चिम एक टील्हे पर बने पुराने समय के रेल सिगनल घर के नीचे झलकती मध्यकालीन दीवारों से भी इसके फैलाव के प्रमाण मिलते हैं।
मेगास्थनीज और ह्वेनसांग ने इस किले को उस जमाने की बेहतरीन कलाकृतियों में से एक बताया है. ये किला मुगल काल के कई राजाओं के बारे में भी जानकारी देता है. तब राजा बंगाल जाने से पहले यहां विश्राम किया करते थे.
साहेबगंज में मंडरो प्रखंड में स्थित ये किला अब खंडहर से अधिक कुछ नहीं लगता और असमाजिक तत्वों का अड्डा बन है. इस सिलसिले में जिला प्रशासन को कई बार सूचित भी किया गया. लेकिन अबतक कोई पहल नहीं हुई है.
तेलियागढ़ी किला को बचाने के लिए समय-समय पर सामाजिक संगठनों के द्वारा प्रयास किए जाते रहे हैं. जंगल बन चुके स्मारक की साफ-सफाई भी की जाती रही है. असमाजिक तत्वों के खिलाफ अभियान भी चलाए जाते रहे हैं.
प्रखंड के बीडीओ बताते हैं कि सरकार को उपायुक्त के माध्यम से कई बार इसके सौन्दर्यीकरण का प्रस्ताव भेजा गया. लेकिन अबतक कोई निर्देश नहीं आया. हालांकि छोटे स्तर पर इसे बचाने के प्रयास जारी हैं

Monday, 27 November 2017

इस मंदिर में महिलाओं को नहीं देते हैं प्रसाद, 200 साल पुरानी ऐसी हैं परंपरा

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जमशेदपुर।झारखंड के जमशेदपर से करीब 40 किलोमीटर दूर एक मंदिर ऐसा हैं जहां महिलाएं पूजा कर सकती हैं, भगवान को प्रसाद भी चढ़ा सकती हैं लेकिन प्रसाद खाने की उन्हें परमिशन नहीं हैं। 200 साल पुराने इस हाथीखेदा मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं।
महिलाओं ने कही ये बात
- मंदिर में तिलक लगाने और रक्षा सूत बांधने की भी मनाही है। हालांकि यह कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों है। दर्शन के लिए मंदिर पहुंची महिलाओं से बात की तो वे बोलीं- महिलाओं के प्रसाद ग्रहण न करने की परंपरा बहुत पुरानी है। इस मान्यता के पीछे वजह क्या है, इसे न तो यहां के पुजारी बता पाते हैं और न मंदिर समिति के लोग।
- महिलाओं का कहना है कि वर्षों से परंपरा चली आ रही है। सो उसका पालन कर रहे हैं। अंधविश्वास यह है कि महिलाओं के प्रसाद खाने से परिवार में अपशगुन हो सकता है। जबकि मंदिर में दर्शन के लिए आनेवाले भक्तों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक होती है।

- महिलाओं को हाथीखेदा बाबा पर आस्था है और परंपराओं का निर्वाह करते हुए वे सिर्फ पूजा करती हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी गिरिजा प्रसाद सिंह सरदार इस परंपरा को आगे भी जारी रखने की बात कहते हैं। आदिवासी समाज के कुल देवता की पूजा हाथीखेदा मंदिर में होती है।
- मंदिर परिसर में भक्त पेड़ों में नारियल बांधने के साथ बाबा को घंटी चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार, करीब 200 साल पहले इस इलाके में हाथियों का आतंक था।
- हाथियों का झुंड फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही लोगों को मार देता था। इससे बचने के लिए लोगों ने कुल देवता से प्रार्थना की। इसके बाद हाथियों का आना बंद हो गया। खुशी से ग्रामीणों ने पटमदा में मंदिर बनवाया।
- लोगों का मानना था कि बाबा के प्रभाव से ही हाथियों का आना बंद हुआ है इसलिए हाथीखेदा बाबा के नाम से यहां पूजा शुरू हो गई।

Friday, 24 November 2017

सड़कों पर ट्रैफिक नियम तोड़ा तो खैर नहीं

रांची की सड़कों पर ट्रैफिक नियम तोड़ा तो खैर नहीं, चौक - चौराहों पर लगेंगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर, CM की ने कहा- जो धौंस दिखाए, उनका नाम-नंबर नोट करें

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ट्रैफिक सिस्टम सुधारने के लिए प्लानिंग करके काम करने की जरूरत है। जो भी योजना बनाएं, उसे कड़ाई से लागू भी कराएं। जनभागीदारी अधिक से अधिक कराएं, तभी हम शहर को गंदगी मुक्त और जाम मुक्त बना पाएंगें। चेकिंग के दौरान जो बड़े लोगों को धौंस दिखाये, उनका वाहन नंबर, नाम और मोबाइल नंबर नोट करें। घर पर सीधे चालान भेजें। प्रमुख चैक-चौराहों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (एएनपीआर) सिस्टम लगाएं, ताकि कानून तोड़ने वाले का वाहन नंबर खुद से आ जाये।

स्वच्छ और जाम मुक्त हो शहर...
दुकानदारों, ऑटो व इ-रिक्शा चालकों के साथ अलग-अलग बैठक करें। सभी को समझाएं की यह अपना शहर है, इसे स्वच्छ और जाम मुक्त बनाने में उनकी अहम भूमिका है। सीएम झारखंड मंत्रालय में राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था और स्वच्छता को मुद्दे पर गुरुवार को बैठक कर रहे थे।

दुकान के बाहर एक भी समान नहीं रखा होना चाहिए
सीएम ने कहा कि दुकान के बाहर एक भी समान नहीं रखा होना चाहिए। दुकान के बाहर जो समान रखता है, उन्हें पहले चेतावनी दें। फिर भी नहीं माने, तो कानूनी कार्रवाई करें। इसी प्रकार ऑटो व इ-रिक्शा चालकों को बुलाकर समझाएं कि जहां-तहां न रोके और लगाएं। इसके बाद भी नहीं माने, तो वाहन को सीज कर लें।

पुलिस इंचार्ज और ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेवार बनाएं
इसी के समानांतर उस क्षेत्र के पुलिस इंचार्ज और ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेवार बनाएं। उनके क्षेत्र में सड़क पर दुकान का समान रहे या जहां-तहां वाहन ऑटो-इ-रिक्शा लगें हों, तो उन्हें सीधे बर्खास्त किया जायेगा। जो अच्छा काम करें, उन्हें पुरस्कृत करें।

राजधानी के सभी चौक-चौराहों को खाली रखें
राजधानी के सभी चौक-चौराहों को खाली रखें। वहां न तो ठेले-खोमचे लगें और न ही कोई वाहन रुके। इससे भी ट्रैफिक स्मूथ होगा। किशोरी सिंह यादव चैक, कांटाटोली चैक, लालपुर चैक समेत शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर ऑटो आदि रूकने पर वहां तैनात ट्रैफिककर्मी दोषी होगा। उस पर कड़ी कार्रवाई करें।

दोपहिया वाहनों पर हेलमेट पहनना कड़ाई से लागू करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि जान बहुत कीमती है। दोपहिया वाहनों की सड़क दुर्घटना में आये दिन बच्चों की मौत की खबर आती रहती है। मौत से पूरा परिवार उजड़ जाता है। बच्चे जोश में बिना हेलमेट तेज वाहन चलाते हैं। कई बार वे अपने साथ दूसरे लोगों को भी चोट पहुंचा देते हैं।

हेलमेट पहनना कड़ाई से लागू करें
दोपहिया वाहनों पर हेलमेट पहनना कड़ाई से लागू करें। रिंग रोड व हाइवे पर भी बिना हेलमेट कोई दोपहिया वाहन न चले। रिंग रोड व हाइवे पर दिन में भी लोग वाहनों की हेडलाइट जलाकर चलें। सीट बेल्ट भी जरूरी करें। इससे दुर्घटनाओं में मानव जीवन को बचाया जा सकेगा। पुलिसकर्मियों के लिए नियम और कड़ाई से लागू हो। यदि ये बिना हेलमेट वाहन चलाएं या कानून तोड़ते हैं, तो उन्हें फाइन करने के साथ साथ कानूनी कार्रवाई भी करें।
रांची रेलवे स्टेशन रोड़ पर ट्रैफिक कम करने के लिए डोरंडा तरफ से एक सड़क स्टेशन तक जोड़ने का निर्देश दिया। इससे उस क्षेत्र के लोगों को घूम कर स्टेशन नहीं आना पड़ेगा और मुख्य सड़क पर दबाव भी कम होगा।

सफाई के लिए भी दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालों को जागरूक करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई के लिए भी दुकानदारों, ठेले-खोमचे वालों को जागरूक करें। दुकानदारों को डस्टबिन लगाने और कुड़ा कचरा उसी में डालने की हिदायत दें। ठेले-खोमचेवालों को भी निश्चित स्थान पर कचरा डालने का निर्देश दें। नहीं माने तो सभी पर कानूनी कार्रवाई करें। मोरहाबादी, कचहरी रोड आदि पर लगानेवाले सब्जी बाजार को भी सड़क से हटाकर दूसरे स्थान पर लगवायें। शहर में ऑटो व इ-रिक्शा पड़ाव के लिए एक सप्ताह में प्लानिंग तैयार कर लाने को कहा।
बैठक में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित खरे, एडीजी पीआर नायडू, रांची जोन के आईजी नवीन कुमार सिंह, रांची के उपायुक्त मनोज कुमार, एसएसपी कुलदीप द्विवेदी, नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि, ट्रैफिक एसपी संजय रंजन समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

Wednesday, 22 November 2017

झारखंड : अंडमान-निकोबार को झारखंडियों ने बसाया, लेकिन खुद ही यहां हो गये प्रवासी


अंडमान-निकोबार को झारखंडियों ने अपनी कर्मठता और मेहनत के बल पर सुगम बनाया है़ छोटानागपुर के आदिवासियों ने इस दुर्गम भूखंड को रहने लायक बनाया़ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के घनघोर जंगलों के चप्पे-चप्पे में झारखंड के आदिवासियों के पौरुष की कहानी है़ झारखंडियों ने अंडमान-निकोबार में दूसरों को बसाया.

इस खूबसूरत वादियों में आज लोग रहते हैं.  देश-दुनिया से लोग अंडमान-निकोबार को देखने पहुंचते हैं. लगभग सौ वर्ष पहले दक्षिणी छोटानागपुर से हजारों की संख्या में झारखंड के आदिवासियों को जंगल कटाई के लिए यहां लाया गया था़ आज इनकी दूसरी पीढ़ी अंडमान-निकोबार के विभिन्न द्वीपों में रहती है़ 


अकेले पोर्ट ब्लेयर में 50 हजार से ज्यादा झारखंड के आदिवासी होंगे़ गुमला, खूंटी, सिमडेगा, रांची जैसे इलाके के आदिवासी यहां हैं. झारखंड के आदिवासियों ने अंडमान-निकोबार को अपना बनाया़   यहां रच-बस गये, लेकिन इस भू-भाग में वे पहचान की संकट झेल रहे हैं. झारखंड के आदिवासियों को यहां एसटी का दर्जा नहीं है. आदिवासी होने के अधिकार से वंचित हैं.

वर्षों से यहां झारखंडी आदिवासी अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं.  सरकारी नौकरियों में किसी तरह का आरक्षण नहीं मिल रहा है़ केंद्र शासित इस प्रदेश में सरकारी नौकरी में झारखंडियों की भागीदारी नगण्य है़  खेतीबारी के लिए इनके पास जमीन नहीं है़    झारखंड के आदिवासियों को पोर्ट ब्लेयर में लोग रांची भाई पुकारते हैं, लेकिन बस केवल कहने भर के लिए झारखंडी आदिवासी को भाई कहा जाता है, व्यवहार सौतेला है़ 

दूसरों को बसाने वाले हो गये अतिक्रमणकारी

अंडमान-निकोबार में दूसरों के सहज जीवन के लिए खून-पसीना बहाने वाले झारखंडी आदिवासी ही यहां अतिक्रमणकारी हो गये़   वर्षों पहले इनके मां-बाप या दादा-दादी अंडमान-निकोबार आये थे़ 

किसी परिवार के बसे हुए 100 वर्ष हो गये, तो किसी के 70 वर्ष़ लेकिन इनको अपने बसेरे के लिए जमीन नहीं मिली़   अलग-अलग जगहों पर जंगल काट कर अपना घर-बगान बनाया है, लेकिन सरकार इसको अवैध मानती है़   पोर्ट ब्लेयर में भी एक छोटी सी बस्ती है, लेकिन सरकार की नजर में यह अतिक्रमण है़   पार्ट ब्लेयर की एक दुकान में काम करने वाली युवती सिलबिया ने बताया कि हमारे पास जमीन नहीं है़ 

वर्षों पहले पिताजी जंगल विभाग में काम करते थे़   उन्होंने ही एक छोटी सी जमीन में घर बनाया है़  हमें किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिलती है़   हमें इनक्रोचर बताया जाता है.

लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं झारखंडी

झारखंडी आदिवासी अपनी मुकम्मल पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं. देश की आजादी के बाद भी इस भू-भाग में इनको अधिकार नहीं मिला़ इस बड़े समुदाय के लिए प्राइवेट की छोटी नौकरियां और मजदूरी करने की विवशता है़   

पोर्ट ब्लेयर से दिगलीपुर की तरफ जाते हुए फेरारगंज, बाराटांग, जिरकाटांग एवं रामनगर में रांची भाई की बस्तियां हैं. इस बड़े समुदाय ने प्रधानमंत्री रहे  इंदिरा गांधी,  राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी के सामने दूसरी जगहों की तरह अंडमान में भी आदिवासी दर्जा दिये जाने की मांग की है. वर्षों से लड़ाई लड़ रहे हैं. इन समुदायों द्वारा बार-बार धरना-प्रदर्शन किया जाता है और जुलूस निकाला जाता है. रांची भाइयों का अपना संगठन है, लेकिन हक आज तक नहीं मिला़.

Thursday, 16 November 2017

मणिपुर में चार आतंकियों को मारकर शहीद हुआ झारखण्ड का लाल


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रांची के चान्हो के रहने वाले जवान बुधवार को आतंकी मुठभेड़ में शहीद हो गए. जवान जयप्रकाश उरांव ने चार आतकवादिओं को भी मार गिराया।

असम राईफल्स के जांबाज और झारखंड के लाल जयप्रकाश उरांव 20 नवंबर को घर आने वाले थे. 01 नवंबर को मणिपुर में अपनी टीम को ज्वाईन करने वाले जयप्रकाश की पिछले दिनों पत्नी से बात हुई, तो उन्होंने कहा था कि 20 नवंबर को घर आयेंगे. पत्नी के साथ उनके बच्चे और माता-पिता भी उनके आने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन, तय तारीख से पांच दिन पहले उनके इस दुनिया से जाने की खबर आ गयी. पूरे गांव में मातम छाया हुआ है. 20 नवंबर को 4 असम राईफल्स के जिस जवान के स्वागत की तैयारी में परिवार के लोग जुटे थे, अब उसी जवान के शव की उन्हें अगवानी करनी होगी.
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सरकार शहीद के परिजनों को 10 लाख की सहायता राशि प्रदान करेगी।
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-सुकरा उरांव और लक्ष्मी उराईन के लाल हैं जयप्रकाश उरांव
-जयप्रकाश सात भाई-बहन हैं. उनकी तीन बहनें हैं और चार भाई. सात भाई-बहनों में वह दूसरे स्थान पर थे.
-बीए पार्ट वन तक की पढ़ाई की थी जयप्रकाश ने.

-वर्ष 2005 में सेना में भर्ती हुए थे जयप्रकाश उरांव.
-वर्ष 2010 में ऐमा संगीता लकड़ा से जयप्रकाश की शादी हुई.
-एक नवंबर को मणिपुर में ज्वाईन किया था.

-जयप्रकाश की दो बेटियां हैं. उनके नाम सृष्टि (4) और स्मृति (2) हैं.

शहीद जवान को सत सत नमन.. जय हिन्द

BPSC ने निकाली 355 वैकेंसी, इस तरह करें अप्लाई



बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) ने 355 पदों के लिए वैकेंसी निकाली है. इच्छुक उम्मीदवार 13 नवंबर से आवेदन कर सकते हैं. कुल 355 पदों में सीटीओ के 123 पद, डीएसपी के 6, एसडीओ के लिए 16 पदों पर भर्ती होनी है.

BPSC ने पिछली बार परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया था. लेकिन इस बार परीक्षा के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया है. प्रारंभिक परीक्षा 150 अंकों की होगी.

इस एग्जाम के लिए बिहार में रहने वाले एससी, एसटी और पीडव्लूडी कैंडिडेट को 200 रुपए फीस देनी होगी, वहीं जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट को 750 रुपए फीस देनी होगी.

आवेदन आप ऑनलाइन कमीशन की वेबसाइट- www.bpsc.bih.nic.in पर कर सकते हैं.

Wednesday, 15 November 2017

चारा घोटाले में पूर्व IAS सजल चक्रवर्ती दोषी करार, भेजे गए जेल


रांची। सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और चाईबासा के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर सजल चक्रवर्ती को चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिया है। उन्हें 21 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी। उन्हें जेल भेज दिया गया है।

-चाईबासा कोषागार से 37.70 करोड़ रुपए की अवैध निकासी से संबंधित चारा घोटाला मामले में अदालत ने मंगलवार को फैसले की तिथि निर्धारित की थी।

-सजल के खिलाफ आरोप था कि चाईबासा के डीसी रहते हुए इन्होंने कोषागार पर कोई नियंत्रण नहीं रखा। इस कारण कोषागार से मोटी रकम की निकासी होती रही। इसके अलावा उनपर लैपटॉप लेने के भी आरोप थे।

-इसका खुलासा होने पर बड़ा घोटाला प्रकाश में आया। मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र को वर्ष 2013 में सजा सुनाई जा चुकी है। पूरक अभिलेख की सुनवाई में सजल आरोपी हैं।

रांची में राष्ट्रपति : स्थापना दिवस पर एंबुलेंस सेवा और जोहार योजना का किया शुभारंभ .



रांची (झारखंड)। प्रेसिडेंट रामनाथ कोविंद ने बुधवार को रांची में झारखण्ड स्थापना दिवस के अवसर पर 108 नंबर की इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत मेडिकल इमरजेंसी में एंबुलेंस सेवा सभी लोगों के लिए बिल्कुल मुफ्त है। इसके अलावा राष्ट्रपति ने 1500 करोड़ की जोहार योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना से 2 लाख ग्रामीण परिवारों की आय दोगुनी होगी। राष्ट्रपति ने 636 करोड़ की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना में राज्य के 57 लाख गरीब परिवारों का 2 लाख का स्वास्थ्य बीमा बिल्कुल मुफ्त होगा।
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- कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने गृह विभाग में अनुकंपा पर नवनियुक्त आरक्षियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। मानकी मुंडा ई-विद्यावाहिनी योजना के तहत टीचरों को टैब और उज्जवला योजना के तहत लाभुकों को सिलेंडर गैस चूल्हा का वितरण किया गया।

- राष्ट्रपति ने 24 यूनिवर्सिटी टीचरों, स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स, प्लस टू टीचर और आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।

- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राशि का वितरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और बीपीएल महिलाओं को 90 प्रतिशत अनुदान पर दुधारू गाय का भी वितरण राष्ट्रपति ने किया।

- इसके अलावा मुद्रा लोन, सखी मंडलों के बीच राशि का वितरण और
दिव्यांगों के बीच लैपटॉप और प्रमाण पत्र भी राष्ट्रपति ने लाभुकों को प्रदान किए।

- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 हजार लाभुकों के बीच राष्ट्रपति ने लाभुकों के बीच सांकेतिक रूप से नवनिर्मित आवास की चाभी सौंपी।

- कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों राजभवन से बिरसा चौक तक स्मार्ट रोड, हरमू फ्लाईओवर (294.4 करोड़ रुपए की लागत) और कांटाटोली फ्लाईओवर (181.12 करोड़ रुपए की लागत ) का शिलान्यास हुआ।

Tuesday, 14 November 2017

लातेहार में नहीं हुई थी मुठभेड़, जवान ने बतायी सच्चाई - अधिकारियों के दावे की खुली पोल


लातेहार : जिले के लाटू टोंगरी में गत दस नवंबर को माओवादियों के द्वारा फायरिंग करने एवं लैंड माइंस विस्फोट करने के पुलिसिया दावा की पोल घायल जवानों ने ही खोलनी शुरू कर दी है. सूत्रो का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस के आला अधिकारी इसे मुठभेड़ का नाम देना चाह रहे हैं, जबकि घायल जवान इंकार कर रहे हैं. दरअसल इस घटना के वक्त सीआरपीएफ 112 वीं बटालियन के डिप्टी  कमांडेंट एचएल गंगते अपने जवानों के साथ बुढ़ा पहाड़ के रास्ते में माओवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन में थे.
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तभी रास्ते में लैंड माइंस होने का अंदेशा हुआ. ग्रामीणों से पूछा तो ग्रामीणों ने कहा कि माओवादी उन्हें इस रास्ते पर चलने से मना करते हैं. बस पुलिस के जवान सर्तक हो गये. जवानों ने एक लैंड माइंस को खोज निकाला और उसे डिफ्यूज करने का प्रयास करने लगे.  तभी सीज किये गये कई बमों में धमाके हो गये और श्री गंगते समेत चार जवान घायल हो गये.
घायलों में रेडियो आपरेटर नीतिश पांडेय, कांस्टेबल दीपक सिंह एवं गोपाल यादव शामिल हैं. सभी को हेलीकॉप्टर से रांची मेडिका ले जाया गया. उधर, अधिकारियों ने कहा कि माओवादियों ने हमला किया. इस हमले में जवान घायल हुए हैं. मालूम हो कि शीर्षस्थ माओवादी अरविंद जी एवं सुधाकरण जी को पकड़ने के नाम पर पिछले साल से बुढ़ा पहाड़ में सघन ऑपरेशन चलाया जा रहा है और करोड़ों रूपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन नतीजा शिफर रहा है.

बाहर हूं, बीमार हूं, जानकारी नहीं है : एसपी
लातेहार एसपी धनंजय कुमार सिंह का इस संबंध में कहना है कि वे बीमार हैं और बाहर हैं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

पहले भी दी थी गलत जानकारी
गत 15-16 अक्तूबर को बालुमाथ थाना क्षेत्र में पुलिस की दो टुकड़ियां आपस में ही भीड़ गयी थी और आइआरबी का जवान विवेश कुमार दूसरी ओर तैनात पुलिस की ही गोली से घायल हुआ और पुलिस के अधिकारियों ने टीपीसी के साथ मुठभेड़ की अफवाह उड़ायी.

क्या था मामला
लातेहार जिले के बारेसाढ़ थाने से 20 किमी दूर लाटू जंगल के चुलहा टोगरी में माओवादियों ने लैंड माइन ब्लास्ट किया था. घटना में सीआरपीएफ 122वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट एचएल गांग्टे सहित चार जवान घायल हो गये थे. घायल होनेवाले जवानों में रेडियो ऑपरेटर नीतीश पांडेय, सिपाही दीपक सिंह और गोपाल यादव शामिल थे. घटना शुक्रवार दिन के करीब 12.30 बजे की है. बताया जाता है कि जवान इसी रास्ते से गुजर रहे थे. लैंड माइन ब्लास्ट करने के बाद नक्सलियों ने जवानों को निशाना बना कर फायरिंग शुरू कर दी.
सीआरपीएफ जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की और नक्सलियों पर फायरिंग शुरू कर दी. करीब दो घंटे की मुठभेड़ के बाद नक्सली जंगल की ओर भाग गये. घायल जवानों को हेलीकॉप्टर से तत्काल रांची लाया गया. सभी को मेडिका अस्पताल में इलाज चल रहा है. सभी खतरे से बाहर बताये जा रहे हैं. सूचना मिलने के बाद सीआरपीएफ, पुलिस मुख्यालय और रांची पुलिस के कई अफसर मेडिका अस्पताल पहुंचे.