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Tuesday, 13 June 2017

किसानों ने की आत्महत्या

किसान आत्महत्या: जानवर चर गये थे खेत, 61608 रुपये का कर्ज था कलेश्वर पर,भूगोल में स्नातक था कलेश्वर,खेती में मिल चुका था सम्मान
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रांची : पिठोरिया में आत्महत्या करनेवाले कलेश्वर महतो के घर पर सोमवार को पूरा प्रशासनिक अमला पहुंच गया. पिठोरिया से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित सिमलबेड़ा गांव में रहनेवाले कलेश्वर पर 61608 रुपये का कर्ज था. उसने पत्नी मनोरमा देवी के नाम पर खेती करने के लिए बैंक से पैसे लिये थे. मनोरमा देवी के नाम से केसीसी का खाता सात फरवरी 2009 को खुला था.

उस वक्त 40 हजार रुपये लोन की राशि स्वीकृत की गयी थी. यह राशि बढ़ कर 61 हजार से अधिक हो गयी थी. कुछ दिन पहले ही पत्नी को बैंक से नोटिस मिला था. बेटी प्रीति व प्रिया के साथ बैठी पत्नी मनोरमा बताती हैं : कलेश्वर कुछ दिन से परेशान थे. खेती अच्छी नहीं थी. फसल को नुकसान हो गया था. करीब 50 डिसमिल में मूंग लगाया था. इसे जानवर चर गये थे. लेकिन, वह आत्महत्या कर लेंगे, ऐसी उम्मीद नहीं थी. घर में कलेश्वर की बूढ़ी मां भी रहती है.

भूगोल में स्नातक था कलेश्वर : करीब 46 साल का कलेश्वर पढ़ा-लिखा था. उसने रांची विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातक की पढ़ाई की थी. पत्नी मनोरमा भी इंटर तक पढ़ी हुई है. दोनों बेटियां कांके स्थित कस्तूरबा विद्यालय में वर्ग नौ और छह की छात्रा हैं. कलेश्वर का भतीजा राजेंद्र महतो ने बताया , 10 जून को मनोरमा देवी दूध बांटने गयी थी. घर लौटी, तो कलेश्वर नहीं था. वह अपने पति को खोजने किसुन महतो के घर गयी. घर के सामने स्थित खेत पर भी गयी. पर कलेश्वर नहीं मिला. बाद में उसकी नजर पास में स्थित महुआ के पेड़ पर गयी. वहां कलेश्वर फंदे से झूल रहा था. मनोरमा देवी ने इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी. आनन-फानन में कलेश्वर को नीचे उतारा गया, पर उसकी मौत हो चुकी थी. बाद में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. घटनास्थल से एक पन्ने का लिखित नोट मिला है. इसमें लिखा हुआ है, बढ़ता बैंक कर्ज, मेरे फसलों और पेड़-पौधे के नुकसान के कारण इस निर्णय पर पहुंचा हूं. इसके लिए मेरे किसी बच्चे या रिश्तेदार को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. मैं अपना शरीर त्याग रहा हूं. इस पत्र में 10 जून की तिथि का जिक्र किया गया है.

खेती में मिल चुका था सम्मान
कलेश्वर पहले पिठोरिया के निजी विद्यालय में शिक्षक था. बाद में खेती करने लगे. रामकृष्ण मिशन की सहायता से पूर्व में खेती से अच्छा फायदा भी हुआ था. उसे रामकृष्ण मिशन में सम्मानित भी किया था. अपने नाम से केसीसी से पूर्व में 25 हजार रुपये का लोन लिया था. उसे उसने चुकता भी कर दिया था. अभी उसकी पत्नी के नाम से लोन था.

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