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Wednesday, 18 April 2018

स्थानीय एवं नियोजन समिति की बैठक संपन्न


स्थानीय एवं नियोजन समिति की बैठक मंगलवार को प्रोजेक्ट भवन में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के अनुसूचित 13 जिलों में अगले 10 वर्षों तक संबंधित जिले के स्थानीय निवासियों को नियुक्ति का पात्र माने जाने संबंधी संबंधी रिपोर्ट पर सदस्यों द्वारा सहमति दिये जाने के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री जी को प्रस्तुत किया गया।
पूर्व में हुए बैठक में विषम भूपृष्ठीय बनावट, जल संसाधन की कमी, वनोंच्छादन का ह्रास और अनियंत्रित त्वरित औद्योगिकीकरण के कारण राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों का सामाजिक संकेतांक और सबसे कम होने जैसे कारकों का उल्लेख किया गया था। राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों के पक्ष में नियोजन का अतिरिक्त अवसर प्रदान कर वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य के 13 अनुसूचित जिलों में जिला स्तरीय तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर संबंधित जिले के स्थानीय निवासियों को ही पात्र माना गया है।
वस्तुतः राज्य की गैर अनुसूचित जिलों की स्थिति अनुसूचित जिलों से भी बदतर है। कृषि क्षेत्र में पलामू, गढ़वा, चतरा, धनबाद, रामगढ़, कोडरमा, का बुवाई क्षेत्र राज्य के अनुसूचित जिलों से भी कम है। पलामू, गढ़वा, चतरा आदि जिले वृष्टि छाया क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। फलस्वरुप इन जिलों में सामान्य से कम वर्षा होती है। पलामू, गढ़वा, चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, गोड्डा आदि गैर अनुसूचित जिलों की भूपृष्ठीय बनावट राज्य के अनुसूचित जिले की तरह है। इन जिलों में सड़क संपर्क का भी घोर अभाव है। समिति ने कहा कि राज्य की गैर अनुसूचित जिलों की भौगोलिक बनावट, जल संसाधन की स्थिति, मानव विकास सूचकांक, सामाजिक संकेतांक और अनियंत्रित औद्योगिकीकरण, सामाजिक आर्थिक स्थिति राज्य की 13 अनुसूची जिले की तुलना में बेहतर नहीं है।
भारत सरकार की नीति आयोग के द्वारा चयनित 115 ASPIRITATIONAL DISTRICTS की सूची में झारखंड राज्य के 19 जिले समाविष्ट है। जिनमें से 8 जिले (पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़ और गोड्डा) गैर अनुसूचित जिले हैं। नीति आयोग, भारत सरकार ने महत्वपूर्ण HUMAN DEVELOPMENT INDICIES तथा DEVELOPMENT PARAMETERS के आधार पर देश के अत्यंत पिछड़े 115 जिलों की सूची तैयार की है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, कृषि एवं सिंचाई, वित्तीय समावेशन एवं कौशल उन्नयन तथा आधारभूत संरचना में अत्यंत पिछड़ा है। राज्य के गैर अनुसूचित 8 जिले भारत सरकार द्वारा निर्धारित डेवलपमेंट पारामीटर के नीचे है। इसके आलोक में समिति के द्वारा इस बात पर जोर दिया गया कि राज्य के गैर अनुसूचित जिलों में भी जिला स्तर के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर संबंधित जिले के स्थानीय निवासियों को ही अगले 10 वर्षों तक नियुक्ति का पात्र माना जाये।
झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित किए जाने वाले संयुक्त और सैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षाओं में आरक्षण के प्रावधान लागू किए जाने के संदर्भ में समिति के " प्रथम से लेकर चतुर्थ संयुक्त और सैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षाओं में आरक्षण के प्रावधान को लागू रखा गया था। किंतु पंचम संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा से प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर आरक्षण के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया"। इस संबंध में राज्य सरकार के द्वारा आयोग को कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया था। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के बिना किसी ने निदेश के "पंचम संयुक्त सैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर आरक्षण के प्रावधान को समाप्त करने के लिए आयोग को जवाबदेह बताते हुए दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही गयी"। साथ ही सदस्यों द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के संदर्भ में आरक्षण के प्रावधान प्रारंभिक परीक्षा के स्तर से ही लागू किए जाने के संबंध में स्पष्ट अंकन किया गया है कि झारखंड लोक सेवा आयोग के प्लान ऑफ एग्जामिनेशन/ रूल ऑफ प्रोसीजर में करने तथा *प्रथम से लेकर चतुर्थ संयुक्त सैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की व्यवस्था पुनः बहाल करने का अनुरोध राज्य सरकार से किया गया है*।
समिति ने पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु आरक्षण समिति प्रतियोगिता परीक्षा में शारीरिक दक्षता के लिए निर्धारित मापदंडो को त्रुटिपूर्ण बताया गया। क्योंकि इन परीक्षाओं में भी शारीरिक दक्षता के लिए भी मापदंड निर्धारित किए गए हैं। जो इन पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए निर्धारित हैं। इस संबंध में समिति द्वारा विचार कर पुलिस अवर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु उक्त मापदंड को शिथिल करने एवं पूर्व में आयोजित लिखित समिति प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर ही इनके शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन कराने का अनुरोध राज्य सरकार से किया है।
समिति ने यह प्रस्ताव रखा है कि राज्य के स्थानीय निवासियों का राज्य के सरकारी नौकरियों में अधिकतम प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय निवासियों (महिलाओं सहित) के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 वर्ष निर्धारित किया जाए। साथ ही जब तक इस समिति के द्वारा की जाने वाली अनुशंसा पर राज्य सरकार के स्तर पर निर्णय नहीं ले लिया जाता, तब तक के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के स्तर से नियुक्ति के संबंध में की जाने वाली सभी कार्रवाई की घोषणा को स्थगित रखा जाए।
समिति ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि राज्य सरकार के अधीन नियुक्ति के लिए सभी प्रतियोगिता परीक्षाओं में आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं को प्रदान किया जाए जिनका नाम खतियान में दर्ज है।

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