Wednesday, September 22, 2021
HomeTech Newsअंतरिक्ष में सबकुछ हवा में तैरता है, तो स्पेस में टॉयलेट कैसे...

अंतरिक्ष में सबकुछ हवा में तैरता है, तो स्पेस में टॉयलेट कैसे इस्तेमाल करते हैं एस्ट्रोनॉट? – sports News Hindi Livenow24x7 | Livenow24x7.com

अब तो पृथ्वी से अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है. पृथ्वी से बहुत से एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में जा चुके हैं, जहां स्पेस सेंटर में कई तरह की खोज करते रहते हैं. हो सकता है कि आपने उन लोगों के वीडियो भी देखे होंगे और आपने गौर किया होगा कि वो जीरो ग्रैविटी वजह से हवा में तैरते हुए दिखाई देते हैं. वे जब चलते भी हैं तो उनके पांव नीचे की सतह से जुड़े नहीं होते हैं. लेकिन, कभी आपने सोचा है कि अगर वे शौचालय का इस्तेमाल कैसे करते होंगे.

आज हम आपको बताते हैं कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट किस तरह से टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं और शौच के लिए उनके लिए क्या व्यवस्था होती है. कुछ साल पहले जब सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में गई थीं, तब उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस सेंटर के बारे में बताया था.
उन्होंने वहां कई वीडियों बनाए थे, जिसके जरिए बताया गया था कि वो एस्ट्रोनॉट्स कैसे रहते हैं, कैसे सोते हैं और कैसे काम करते हैं. इस दौरान उन्होंने स्पेस में टॉयलेट इस्तेमाल करने के बारे में बताया था. आज हम आपको आपके इस सवाल का जवाब देते हैं.

बनाया होता है खास टॉयलेट

दरअसल, अब एक खास तरह का टॉयलेट एस्ट्रोनॉट्स के लिए बनाया जाता है, जो दिखने में आम टायलेट की तरह होता है. ये शौचालय पूरी तरह से हैंडहेल्ड और फुटहोल्ड है, जिससे उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो जहां वे बैठ भी सकते हैं और खड़े भी हो सकते हैं. अंतरिक्ष यात्री टॉयलेट का ढक्कन उठाते हैं और सीट पर बैठते हैं ठीक वैसे ही जैसे आम शौचालय के लिए किया जाता है. ये खास वैक्यूम वाला टॉयलेट होता है, जो हवा के जरिए आपके कचरे को एक टैंक में ले जाता है. साथ पेशाब के लिए भी एक खास तरह का पाइप होता है, जो वैक्यूम पाइप की तरह होता है और एस्ट्रोनॉट पेशाब के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं.

बता दें कि अंतरिक्ष में यूरिन और शौच के लिए अलग अलग टॉयलेट होते हैं. यूरिन को अलग टैंक में रखा जाता है, जहां उसे रिसाइकिल करके पीने के काम में भी लिया जाता है. दरअसल, अंतरिक्ष में टॉयलेट जाना काफी मुश्किल का काम होता है और यह प्रक्रिया के आधार पर ही इस्तेमाल करना होता है.

पहले होती थी अलग व्यवस्था

पहले अंतरिक्ष यात्री खास तरह के एक पाउच का इस्तेमाल करते थे, जिस टॉयलेट के इस्तेमाल के वक्त पीछे बांधना पड़ता था. इसके बाद खास तरह का टॉयलेट बनाया गया, जिसने अंतरिक्ष यात्रियों को पाउच से मुक्ति दिलाई. लेकिन, यह टॉयलेट भी सफाई और यूरिन डिस्पोस्ज आदि के लिए परफेक्ट नहीं था. इसके बाद जब महिलाएं भी अंतरिक्ष में जाने लगी तो टॉयलेट की खास व्यवस्था की गई और जीरो ग्रैविटी के आधार पर बनाए गए इन टॉयलेट का अब इस्तेमाल किया जाता था.

ये हैं भारत के वो शहर, जहां लोग पेट्रोल नहीं अब डीजल भी 100 रुपये लीटर खरीद रहे हैं

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by -. Publisher: sports News Hindi Livenow24x7

Livenow24x7 Newshttps://www.livenow24x7.com
Hey, I’m Er. Kirtan, A electronics & Communication Engineer Working as a Coordinator, and Part-Time Blogger, a Youtuber & Affiliate Marketer, and Founder of Technicalpur.xyz, livenow24x7.com, and YouTube Channel. TechnicalPur is a website that provides you authentic information about SEO, SEM, Blogging, Affiliate marketing, Social Media Marketing, and how to Earn Money through blogging. For Regular Updates Join Us on Telegram Youtube Facebook
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

close