Wednesday, September 22, 2021
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आम लंगड़ा तो नहीं होता, फिर इस शानदार फल का नाम ‘लंगड़ा आम’ कैसे पड़ा, जानिए पूरी कहानी – sports News Hindi Livenow24x7 | Livenow24x7.com

भारत में करीब 1,500 वैरायटी के आम पाए जाते हैं जिनमें 1,000 वाणिज्यिक वैरायटी शामिल हैं. भारत में पाए जाने वाले इन आमों की सबसे खास बात ये है कि इन सभी वैरायटी के आम का नाम और स्वाद अलग-अलग है. भारत में हर साल करीब 1.5 करोड़ टन आम की पैदावार होती है. देश में आम की जबरदस्त डिमांड तो है ही लेकिन विदेशों में भी भारतीय आमों की अच्छी-खासी मांग है. भारतीय आमों का जलवा समझने के लिए इतना ही काफी है कि ये दुनिया के करीब 40 देशों में बड़े स्तर पर निर्यात किया जाता है. इसी सिलसिले में आज हम आपको आम की एक बेहद ही शानदार किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम है ‘लंगड़ा’.

करीब 300 साल पुरानी है लंगड़ा आम की कहानी
लंगड़ा आम अपने अद्भुत स्वाद की वजह से तो दुनियाभर में मशहूर है लेकिन इसका नाम लंगड़ा कैसे पड़ा, इसके बारे में शायद बहुत कम लोगों को ही जानकारी होगी.
आज हम आपको लंगड़ा आम की ही कहानी बताने जा रहे हैं. इसके अलावा हम इसकी पैदावार के बारे में भी कुछ अहम जानकारी देंगे. लंगड़ा आम की कहानी शुरू करने से पहले आपको ये जानना जरूरी है कि इसकी पैदावार उत्तर प्रदेश के बनारस में शुरू हुई थी. आम की ये वैरायटी करीब 300 साल पुरानी है.

बनारस के शिव मंदिर आए साधु ने लगाया था पेड़
बताया जाता है कि बनारस में स्थित भगवान शिव के एक मंदिर में पुजारी हुआ करते थे, उनके पैर खराब थे. पुजारी की इस दिव्यांगता के कारण ही लोग उन्हें लंगड़ा पुजारी के नाम से जानते थे. एक बार की बात है, एक साधु मंदिर में ठहरने के लिए आए और उन्होंने वहां आम के दो पौधे लगा दिए. साधु ने पुजारी से कहा कि जब पौधा बड़ा होकर पेड़ बन जाएगा और फल देना शुरू कर देगा तो इसका सबसे पहला फल भगवान शिव को अर्पित किया जाएगा. इसके अलावा साधु ने पुजारी से ये भी कहा कि वे इस पेड़ का फल किसी और को नहीं देंगे.

और फिर इस तरह पूरे बनारस में प्रसिद्ध हो गया लंगड़ा आम
कई साल बाद जब पेड़ ने फल देना शुरू किया तो पुजारी ने उन फलों से सबसे पहले भगवान शिव का भोग लगाया था. हालांकि, कुछ समय बाद बनारस के राजा ने भी पुजारी से आम ले लिए जबकि साधु ने उन पेड़ों के आम को किसी को भी देने से मना किया था. मंदिर का आम जैसे ही राजा के पास पहुंचा, वह धीरे-धीरे पूरे बनारस में मशहूर हो गया और लोग इसे पुजारी की दिव्यांगता को देखते हुए लंगड़ा आम कहने लगे. जिसके बाद से आम की इस वैरायटी का नाम ही लंगड़ा आम हो गया. भारत में लंगड़ा आम की पैदावार मुख्यतः उत्तर प्रदेश में होती है.

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