Wednesday, September 22, 2021
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इमरान के ‘नए पाकिस्तान’ में बढ़ी गरीबी, एक साल में 20 लाख लोग हुए गरीब, 40 फीसदी परिवारों पर मंडराया ‘भोजन संकट’ – sports News Hindi Livenow24x7 | Livenow24x7.com

पाकिस्तान (Pakistan) में जब से इमरान खान (Imran Khan) ने सत्ता संभाली है, तब से देश की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) का बुरा हाल है. इमरान के शासन में पाकिस्तान में गरीबों (Poverty in Pakistan) की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है. विश्व बैंक (WB) ने अनुमान लगाया है कि पाकिस्तान में साल 2020 में गरीबी 4.4 फीसदी से बढ़कर 5.4 फीसदी हो गई है. इस तरह इमरान के शासनकाल में सिर्फ एक साल के भीतर ही 20 लाख से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं. वहीं, देश की एक बड़ी आबादी को गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है.

द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व बैंक ने निम्न-मध्यम-आय का गरीबी दर के लिए प्रयोग किया.
इसने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान में गरीबी अनुपात 2020-21 में 39.3 प्रतिशत था और 2021-22 में इसके 39.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वहीं, 2022-23 में ये 37.9 प्रतिशत तक कम हो सकता है. वहीं, जब ऊपरी-मध्यम-आय का गरीबी दर के लिए प्रयोग किया गया तो वैश्विक वित्तीय संस्थान ने अनुमान लगाया कि 2020-21 में गरीबी 78.4 फीसदी रही और ये 2021-22 में 78.3 फीसदी पर आ सकती है. 2022-23 में 77.5 फीसदी के साथ इसके नीचे जाने का अनुमान है.

पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि सिर्फ 1.5 फीसदी रही

विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान में 40 प्रतिशत परिवार मध्यम से गंभीर खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं. द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक, जहां विश्व बैंक का अनुमान पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी को दिखा रहा है. वहीं, पाकिस्तानी सरकार ने 2018-19 के लिए गरीबी के आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें संकेत दिया गया है कि 2015-16 में गरीबी दर 24.3 फीसदी थी, जो 2018-19 में घटकर 21.9 फीसदी हो गई. विश्व बैंक का कहना है कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की वजह से वित्त वर्ष 2020 के आखिरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां रुक गईं. इसका नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि सिर्फ 1.5 फीसदी रही.

खराब आर्थिक नीतियों से हुआ देश का बेड़ा गर्क

इस अवधि के दौरान, काम करने वाली आबादी को या तो काम से हाथ धोना पड़ा या फिर उनकी आय में कमी हुई. छोटे-मोटे कामों से जुड़े अनौपचारिक और कम-कुशल मजदूरों को रोजगार में सबसे अधिक कमी का सामना करना पड़ा. पाकिस्तानी डेली के मुताबिक, पिछले दो दशकों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे बढ़ रही है. प्रति व्यक्ति वार्षिक वृद्धि औसतन केवल दो प्रतिशत है, जो दक्षिण एशिया के औसत के आधे से भी कम है. आंशिक रूप से असंगत आर्थिक नीतियों और आर्थिक विकास को चलाने के लिए निवेश और निर्यात पर कम निर्भरता के कारण ऐसा हो रहा है.

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