महिलाओं को परिवार में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए: कृपांनद झा

Ranchi: महिला बाल विकास विभाग के सचिव कृपानंद झा ने कहा की जब एक महिला को उसके परिवार में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण होगा. इसके लिए आवश्यक है कि महिलाओं को परिवारिक सम्पत्ति में हक मिलना चाहिए, ताकि वे वित्तीय रूप से भी सशक्त हों.उन्होंने यह बातें महिला … The post महिलाओं को परिवार में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए: कृपांनद झा appeared first on NEWSWING.

महिलाओं को परिवार में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए: कृपांनद झा

Ranchi: महिला बाल विकास विभाग के सचिव कृपानंद झा ने कहा की जब एक महिला को उसके परिवार में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, तभी सही मायने में महिला सशक्तिकरण होगा. इसके लिए आवश्यक है कि महिलाओं को परिवारिक सम्पत्ति में हक मिलना चाहिए, ताकि वे वित्तीय रूप से भी सशक्त हों.उन्होंने यह बातें महिला सशक्तिकरण पर वर्चुअल वर्कशॉप के दौरान कही. केंद्र सरकार के निर्देश पर यह इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला सक्शतीकरण, प्रोटेक्शन,सामाजिक सुरक्षा इत्यादि पर राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने का है.

 

तकनीकी सत्र में सैपलिंग आईवीएफ सेंटर के प्रबंध निदेशक  डॉ मिनाल सिंह ने कहा कि जब कोई महिला अपना उद्यम शुरू करती हैं, तो उनको वित्तीय व सामाजिक चुनौतियों का सामाना करना पड़ता है. इसके लिये उन्हें परिवार द्वारा प्रोत्साहन देना चाहिए एवं सहायता करनी चाहिए.

 

यूनिसेप की बाल सुरक्षा विशेषज्ञ प्रीति श्रीवस्तव द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण एवं अधिकार के बारे में बताया, जिसमें उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण के लिये सबसे पहले परिवार, समाज को आगे आना चाहिए एवं उसके लिये नीति बननी चाहिए. उन्हें अपने आप को सुरक्षित महसूस करना पड़ेगा साथ ही सुरक्षित रहना भी पड़ेगा.

 

वहीं तेजस्विनी परियोजना की राज्य कार्यक्रम प्रबंधक ज्योति वर्मा द्वारा जानकारी दी गयी कि तेजस्विनी परियोजना अन्तर्गत किशोरियों एवं युवतियों को सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण हेतु जीवन कौशल शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. शर्म की अवधारणा से स्वच्छता की ओर तेजस्विनी क्लब की किशोरियाँ एवं युवतियाँ आगे बढ़ रही हैं, जिसके फलस्वरूप विभिन्न तेजस्विनी क्लबों में पैड बैंक की स्थापना की जा चुकी है. इससे समाज की महिलायें भी लाभान्वित हो रही हैं.

 

कायार्शाला के समापन पर महानिदेशक राज्य पोषण मिशन झारखंड राजेश्वरी बी कायार्शाला के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुये कहा कि आज मनरेगा में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है. यह महिला सशक्तिकरण का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है, जिसके चलते कई महिला मुखिया बनी हैं. अब ग्राम सभा में भी महिलाओं की सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है.

 

इस अवसर पर उप सचिव अर्चना मेहता,राज्य के सभी जिलों के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ,विभागीय पदाधिकारी, सभी सहायक निदेशक, यूनिसेफ, नीति न्याय के सहयोगी एवं  समाज कल्याण, तेजस्विनी परियोजनान्तर्गत राज्य एवं जिला इकाई के कर्मी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, सामुदायिक सेवा प्रदाता एवं महिला सशक्तिकरण में कार्य कर रहे प्रतिनिधिगण उपस्थित थे.

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