Tuesday, September 21, 2021
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रूस में हुए ज्वालामुखी विस्फोट से बदला आसमान का रंग, खूबसूरत बैंगनी आकाश को देखकर लोग हुए हैरान – sports News Hindi Livenow24x7 | Livenow24x7.com

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ज्वालामुखी (Volcano) मौजूद हैं. इनमें से कुछ सक्रिय हैं तो कुछ पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुके हैं. वहीं, कुछ ज्वालामुखी ऐसे भी हैं, जहां आस-पास लोगों की आबादी बसती है. दूसरी ओर ऐसे भी ज्वालामुखी बड़ी मात्रा में मौजूद है, जो आबादी से मीलों दूर स्थित हैं. ज्वालामुखी में होने वाले विस्फोट से राख, धूल और जहरीली गैस बड़ी मात्रा में निकलती है. लेकिन आज के दिन रूस के एक ज्वालामुखी में हुए विस्फोट (Volcano Eruptions) के बाद जो घटना हुई, उसने दुनियाभर को हैरान करके रख दिया. दरअसल, ज्वालामुखी विस्फोट के बाद दुनियाभर के कई हिस्सों में शाम के समय आसमान का रंग बैंगनी हो गया.

22 जून 2019 को रूस के रायकोके ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ. 700 मीटर चौड़े इस क्रेटर से निकली धूल और ज्वालामुखीय गैस वातावरण में पहुंच गई. ये विस्फोट इतना बड़ा था कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर मौजूद एस्ट्रोनोट्स तक ने इसे देखा. NASA ने इस विस्फोट की तस्वीर भी ली. इससे पहले इस ज्वालामुखी में 1924 और 1778 में विस्फोट हुआ था. NASA द्वारा जारी की गई तस्वीर में देखा जा सकता था एक मशरूम नुमा आकृति आसमान में बन रही है. हालांकि, उस वक्त ने किसी ने ये नहीं सोचा था कि इस विस्फोट से शाम का नजारा ही बदलने वाला है.

इस वजह से हो रहा था ऐसा

इस बात की जानकारी तब लगी जब यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बुल्डर के रिसर्चर्स ने पाया कि गर्मियों के दौरान सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान बैंगनी हो रहा है. इसके बाद उन्होंने एक हाई-एल्टिट्यूड गुब्बारे को पृथ्वी के समताप मंडल में भेजा, ताकि वहां से नमूनों को इकट्ठा करके लाया जा सके. इससे पता चला कि ज्वालामुखी के ये कण हवा के जरिए सूर्य के प्रकाश को बिखेरते रखे थे. ऐसा ओजोन परत द्वारा प्रकाश के सोखने के संयोजन की वजह से हुआ. यही वजह रही कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान का रंग बैंगनी हो गया. हालांकि, आसमान में इस खूबसूरती को देखकर लोग मंत्रमुग्ध भी हुए.

आसमान नारंगी और लाल इसलिए दिखाई देता है

रिसर्चर्स ने बताया कि आम दिनों में सूर्य से प्रकाश को पृथ्वी के वायुमंडल में एक महत्वपूर्ण मात्रा तक यात्रा करना पड़ता है और नीले प्रकाश का सामना करने वाले एरोसोल से बिखर जाता है. इसका मतलब है कि सूरज के पास की दिशाओं से हमारी आंखों तक कम नीली रोशनी पहुंचती है, जिससे आसमान नारंगी और लाल दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि लेकिन जब ज्वालामुखीय एरोसोल समताप मंडल में मौजूद होते हैं, तो पृथ्वी की सतह के करीब एरोसोल से बिखरी हुई नीली रोशनी फिर से बिखर जाती है, इस बार हमारी आंखों और कैमरों की ओर. इस कारण नीला प्रकाश पहले से ही सूर्य से आने वाली लाल रोशनी के साथ मिल जाता है, जिससे आकाश बैंगनी रंग का हो जाता है.

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