Wednesday, September 22, 2021
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London Olympics 2012: चोट के साथ मैट पर उतरकर योगेश्वर दत्त ने जीता था ब्रॉन्ज, सालों बाद सिल्वर में हो गया था अपग्रेड – sports News Hindi Livenow24x7 | Livenow24x7.com

लंदन ओलिंपिक (London Olympics) खेलों में भारत को कुश्ती में दो मेडल हासिल हुए थे. सुशील कुमार (Sushil Kumar) ने सिल्वर मेडल हासिल किया था वहीं योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. लंदन में योगेश्वर के गले में ब्रॉन्ज डाला गया था लेकिन सालों बाद यह सिल्वर में बदल गया था.

योगेश्वर दत्त के मेडल का सफर शुरू हुआ था 1996 के अटलांटा ओलिंपिक (Atlanta Olympics) में. लिएंडर पेस (Leander Paes) ने 1996 में ब्रॉन्ज मेडल जीता, उन्हें देखकर वह काफी प्रेरित हुए थे और फैसला किया था कि एक दिन वह भी देश के लिए मेडल जीतेंगे. दो ओलिंपिक खेलों में खाली हाथ रहने के बाद आखिरकार साल 2012 में उन्हें सफलता हुई और उनका मेडल जीतने का सपना पूरा हुआ था.

दो ओलिंपिक खेलों में हासिल नहीं कर पाए थे सफलता

आठ साल बाद पहले पहलवान को 2004 के एथेंस में अपने पहले ओलंपिक में भाग लेने का मौका मिला. 21 साल की उम्र में ओलिंपिक खेलने पहुंचे योगेश्वर बहुत अनुभवी नहीं थे. वह पहले ही राउंड में दो बार के ओलिंपिक चैंपियन से हार गए थे. साल 2008 में उनके प्रदर्शन में सुधार हुआ लेकिन वह फिर भी मेडल जीतने में नाकाम रहे थे. योगेश्वर दत्त क्वार्टर फाइनल में पहुंचे, लेकिन जापान के केनिची युमोटो (Kenichi Yumoto) से हार गए थे.

प्री क्वार्टर फाइनल में मिली थी हार

लंदन ओलिंपिक में योगेश्वर दत्त ने अपनी पहली बाउट में बुल्गारिया के अनातोली इलरियनोविच गाइडेका (Anatolie Ilarionovitch Guidea) को 3-1 से हराकर विजयी शुरुआत की. इसके बाद प्री-क्वार्टर फाइनल में भारतीय पहलवान चार बार के वर्ल्ड चैंपियन रूस के बेसिक कुदुखोव (Besik Kudukhov) से हार गए थे. इस मैच में उनकी आंख पर चोट लग गई थी. इसके बावजूद उनकी मेडल की उम्मीद खत्म नहीं हुई. कुदुखो फाइनल में पहुंचे जिससे योगेश्वर को मेडल जीतने का एक और मौका मिल गया. पहले और दूसरे रेपेचेज राउंड में प्यूर्टो रिको के फ्रैंकलिन गोमेज़ (Franklin Gomez) और ईरान के मसूद एस्माईलपुर (Masoud Esmaeilpour) को मात दी.

ब्रॉन्ज मेडल के लिए योगेश्वर का मुकाबला उत्तर कोरिया के री जोंग-म्योंग (Ri Jong-Myong) से था. पहला राउंड हारने के बाद योगेश्वर ने दूसरे राउंड को जीतकर 1-1 से बराबरी की थी. आखिरी राउंड काफी रोमांचक मुकाबला रहा था. अंत में योगेश्वर दत्त ट्रेडमार्क ‘फितले’ दांव का इस्तेमाल करके जीत हासिल की.

सिल्वर में अपग्रेड हो गया था ब्रॉन्ज मेडल

. लंदन ओलिंपिक में योगेश्वर को हराने वाले और रजत पदक जीतने वाले रूसी पहलवान बेसिक कुदुखोव डोपिंग के दोषी पाए गए थे जिसके बाद उनका रजत पदक छीन लिया गया था. हालांकि यह फैसला उनकी मौत के बाद हुआ. चार बार के वर्ल्ड चैंपियन रहे रूसी पहलवान बेसिक कुदुखोव की मौत 2013 में एक कार दुर्घटना में हो गई थी. रियो ओलिंपिक शुरू होने से ठीक पहले इंटरनेशनल ओलिंपिक कमिटी ने लंदन ओलिंपिक के दौरान लिए गए पहलवान बेसिक कुदुखोव के सैंपल पर फिर से डोप टेस्ट किया जिसमें उनको दोषी पाया गया था.

पदक अपग्रेड की घोषणा के बाद योगेश्‍वर भी लंदन में सिल्‍वर मेडल धारी माने जाते हैं. इस तरह लंदन ओलिंपिक में सिल्‍वर जीतने वाले अन्‍य भारतीय प्‍लेयरों पहलवान सुशील कुमार और शूटर विजय कुमार की श्रेणी में शुमार हो गए. इसके साथ ही ओलिंपिक में सिल्‍वर मेडल हासिल करने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बन गए. इसी श्रेणी के 66 किग्रा भार वर्ग में सिल्‍वर मेडल हासिल करने वाले पहले पहलवान सुशील कुमार हैं.

लंदन ओलिंपिक में बिगड़ी तबीयत और थके हुए शरीर के साथ सुशील कुमार ने रचा था इतिहास

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