Tuesday, September 21, 2021
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Tokyo Olympics: सीमा बिस्ला के कैंसर पीड़ित पिता बोले, बेटी ने बढ़ाया मान, हार-जीत खेल का हिस्सा – Daily News Hindi | Livenow24x7.com

ओपी वशिष्ठ, राेहतक। रोहतक के गांव गुढान में सुबह जल्दी उठकर परिवार के लोगों ने ग्रामीणों के साथ टोक्यो ओलिंपिक में पहले मुकाबला देखने के लिए स्क्रीन लगाई। उम्मीद थी, वह बेहतर करेगी और तीन महिला पहलवानों की हार की भरपाई करने का प्रयास करेंगी। लेकिन उम्मीद टूटी और सीमा प्रतियोगिता से बाहर हो गई। ग्रामीणों में खासी मायूसी देखने को मिली। लेकिन कैंसर पीड़ित पिता ने हौसला दिखाते हुए कहा कि हार-जीत खेल का हिस्सा होता है। बेटी का ओलिंपिक में पहुंचकर देश का प्रतिनिधित्व करना ही उनके लिए गर्व की बात है।

गांव में सीमा बिसला के घर में आसपास के लोग सुबह सात बजे ही जुट गए थे। आठ बजे के बाद सीमा का पहला मैच ट्यूनेशिया की पहलवान के साथ हुआ।
लेकिन वह 3-1 के अंतर से मैच हार गईं। रेपचेज का भी अवसर नहीं मिला क्योंकि क्वार्टर फाइनल में ट्यूनेशिया की पहलवान 0-10 के अंतर से हारकर बाहर हो चुकी है। पिता आजाद सिंह ने कहा कि दो खिलाड़ी लड़ते हैं तो उसमें एक ही हार होती है। यह खेल का हिस्सा है। हार से निराशा जरूरी मिली, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं है। सीमा आगे और ज्यादा बेहतर करेगी और देश के लिए अच्छा करेंगी। इसी तरह मां ब्रह्मी देवी ने कहा कि हार-जीत चलती रहती है। टीवी में बेटी को खेलते हुए देखना ही उनके लिए खुशी की बात है।

सीमा का मैच देखने उनके घर गांव के लोग जुटे थे। सीमा की हार के बाद मायूसी नजर आई।

अटैकिंग खेलती तो जीत जाती : राजकुमार हुड्डा

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के कुश्ती कोच राजकुमार हुड्डा का कहना है कि सीमा ने अपना नेचुरल गेम्स नहीं खेला। शुरु से ही बचाव करती दिखी। अगर अटैकिंग रहती को निसंदेह जीत होती। प्रतिद्वंद्वी पहलवान का प्रोफाइल भी बड़ा नहीं था। इसलिए सीमा ने अपना नेचुरल गेम्स खेलना चाहिए था। अब ऐसा क्यों खेली, यह तो वह खुद या उनके साथ गए कोच ही बेहतर जानते हैं। लेकिन सीमा मुकाबले में उलटफेर करने का दम रखती है। कई बड़े टूर्नामेंट में ऐसा कर भी चुकी है।

2007 में कुश्ती खेलना शुरू किया

रोहतक के गांव गुढान निवासी किसान आजाद सिंह की बेटी सीमा बिसला ने सही मायने में कुश्ती 2007 में खेलना शुरू किया। 2009-10 में पुणे में आयोजित सब जूनियर सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीता। इसके बाद 2018 में कामनवेल्थ गेस्म में गोल्ड हासिल किया। हाल ही में बुल्गारिया के सोफिया में आयोजित ओलिंपिक क्वालिफायर विश्व कुश्ती चैंपयिनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश के लिए टोक्यो ओलंपिक में कोटा दिलाया।

अपनी कोच खुद है सीमा बिसला

रेलवे में क्लर्क की नौकरी छोड़कर हरियाणा, खेल विभाग में सीनियर कोच की नौकरी को तवज्जो दी ताकि खिलाड़ियों को देश के लिए तैयार कर सके। वर्तमान में पानीपत में पोस्टिंग है। टोक्यो ओलिंपिक में सीमा बिस्ला से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी। सीमा एक पहलवान के साथ-साथ कुश्ती की सीनियर कोच भी हैं। इसलिए वह अपनी कोच खुद ही थी और मार्गदर्शन अपने विवेक से लेना चाहिए था।

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